shayaron-ki-mahfil
इब्तिदा-ए-इश्क़
The Genesis of Love
मोहब्बत में वो दम कहाँ जो महफ़िलों को सजा दे,
शायर ही तो है जो इक इरशाद पे कहीं भी समाँ बाँध दे|

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